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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, April 2, 2018

हरिद्वार परिपेक्ष्य में 1600 -1700 मध्य चिकत्सा वर्णन

Medical Tourism from 1600-1700 in Haridwar context 
(  शाह काल में उत्तराखंड मेडिकल टूरिज्म ) 
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उत्तराखंड में मेडिकल टूरिज्म विकास विपणन (पर्यटन इतिहास )  -51
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  Medical Tourism Development in Uttarakhand  (Tourism History  )  -  51                  
(Tourism and Hospitality Marketing Management in  Garhwal, Kumaon and Haridwar series--156       उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 156  

    लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन  बिक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 
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           बादशाह औरंगजेब के शासन में विशेष यूनानी चिकित्सक 
 बादशाह औरंगजेब के शासन काल में यूनानी औषधि तंत्र में विकास हुआ।  औरंगजेबी ने कई औषधालय , शरबतआलाय खुलवाए। औरंगजेब की राजसभा  में निम्न प्रमुख यूनानी चिकित्स्क थे -
 हकीम अद -अल -रजक मशरब इस्फ़हान से औरंगजेब की सभा में आया था। 
 हकीम मुहमद अमिन शिराजी प्रसिद्ध हकीम था और उसका बड़ा  सम्मान था। 
 हकीम अलवाई खान का जन्म शिराज में हुआ था और 1700 ई में औरंगजेब की सभासद में सम्मलिता हुआ। 
 हकीम शेख शिराजी औरंगजेब के समय भारत में आया था और औरंगजेब पुत्र शाह आजम खान काल में प्रसिद्धि पायी। 
हकीम दाऊद इस्फ़हान से औरंजेब काल में आया था व शाह अब्बास की राजसभा में प्रमुख सभासद व चिकित्स्क था। 
फ़्रांसिसी चिकित्स्क जो पहले दारा सिकोह का व्यक्तिगत चिकित्स्क था बाद में औरंगजेब की सभा में चिकित्स्क रहा। 
नरुल हक सिरहिंदी ने प्लेग विषय पर 'ऐनल हयात ' पोथी रची। 
 चिकित्स्क मुहम्मद अकबर अरजानी  (सत्रहवीं सदी अंत -अट्ठारहवीं सड़े प्रारंभिक काल ) ने तेरहवीं सदी की जुब्बुद्दीन समरकंदी की चिकत्सा पोथी का अनुवाद किया और कुनुन्चा की औषधि पुस्तक पर टीका लिखी। अरजानी ने कई अन्य पुस्तक भी लिखीं जैसे -तिब्ब -ए  -अकबर , मीजान -ए तिब्ब ,क़ुरबुद्दीन -ए -कादरी , मुफ़रीह -अल -क़ुतुब , मुजरब्बत -ए -अकबरी , हुदूद -ए -अमराज , तिब्ब -ए -हिंदी 
 काजी मुहम्मद आरिफ ने तिब्ब -ए -काजी आरिफ 'पोथी की रचना की। 

         सत्रहवीं सदी में रचित आयुर्वेद निघण्टु 

 सत्रहवीं सदी में निम्न आयुर्वेदिक निघंटुओं  की रचना हुईं  -
लोलिम्बराज कृत -वैद्यवातम्सा अथवा वैद्य जीवन 
केशव का कल्पद्रिकोष 
त्रिमलभट्ट का द्रव्यगुण शतक व द्रव्य दीपिका 
सूर्य कृत चूड़ामणि निघण्टु 
माधवकारा  कृत पर्यायरत्नावली 
हरिचरण सेन कृत पर्यायमुक्तावली जो पर्यायरत्नावली का परिमार्जित  ग्रंथ लगता है 

 भारत में अन्य भाषाओँ में आयुर्वेद पर गन्थ रचे जा रहे थे जैसे  पंद्रहवीं सदी में आचार्य बल्लभाचार्य ने तेलगु  भाषा व संस्कृत में वैद्यचिंतामणि गंथ की रचना की 

Copyright @ Bhishma Kukreti   24/3 //2018 
ourism and Hospitality Marketing Management  History for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी 

                                   
 References

1 -
भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना शैलवाणी (150  अंकों में ) कोटद्वार गढ़वाल
2 - भीष्म कुकरेती , 2013 उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन , इंटरनेट श्रृंखला जारी 
3 - शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड का इतिहास  part -4
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  Medical Tourism History  Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History of Pauri Garhwal, Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History  Chamoli Garhwal, Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History  Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand, India , South Asia;  Medical   Tourism History Tehri Garhwal , Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History Uttarkashi,  Uttarakhand, India , South Asia;  Medical Tourism History  Dehradun,  Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History  Haridwar , Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand, India , South Asia;  Medical Tourism History  Nainital Kumaon, Uttarakhand, India , South Asia;  Medical Tourism History Almora, Kumaon, Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History Champawat Kumaon, Uttarakhand, India , South Asia;   Medical Tourism History  Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand, India , South Asia; 

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