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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, April 15, 2015

मौर्यकालीन हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में वन्य उत्पादन

Forest Produces of Haridwar,  Bijnor,   Saharanpur in Chandragupta Maurya Period

                       मौर्यकालीन हरिद्वार  ,  बिजनौर   , सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में वन्य  उत्पादन 


               Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  - 98     

                       
    

                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -98                      

                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती  


        कौटिल्य ने निम्न वन उत्पादनों का विवरण दिया है जो अवश्य  ही हरिद्वार, बिजनौर व सहारनपुर के वनों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे। 
दारु /फर्नीचर काष्ठ - शाल , शीशम , भवन निर्माण हेतु 
वेणु - बांस व अन्य बांस की प्रजातियां 
बल्ली - बेंट आदि से टोकरियाँ आदि बनतीं थीं 
छाल - विभिन वनस्पतियों की छालें कई प्रकार के उपकरण निर्माण हेतु व दवाइयों में भी। जैसे सेमल , भांग आदि 
रेशे - बाबड़ , मालू आदि 
पत्तियां - ढाक  , मालू , बेडू , तिम्लु के पत्तों से बर्तन व मकान बनाने हेतु 
फूल - कई प्रकार के फूल जो औषधि व रंग निर्माण हेतु 
कंद मूल - भोजन व औषधि हेतु 
विष - कई वनस्पति विष बनाने हेतु प्रयोग होते थे 
विविध - अन्य कार्य हेतुं 
        भाभर में मंडी 
पहाड़ों से वनस्पति उत्पाद को मैदानों में बेचने व मैदानी उत्पाद को पहाड़ों में बेचने के लिए हरिद्वार , बिना , सहरनपुर में मदनियाँ थीं या व्यपारी थे।  


 ** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज 
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर 
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन 
अग्रवाल , पाणिनि कालीन भारत
अग्निहोत्री , पंतजलि कालीन भारत 
अष्टाध्यायी 
दत्त व बाजपेइ  , उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म का विकास 
महाभारत 
विभिन्न बौद्ध साहित्य 
जोशी , खस फेमिली लौ
भरत सिंह उपाध्याय , बुद्धकालीन भारतीय भूगोल 
रेज डेविड्स , बुद्धिष्ट इंडिया 
मुखर्जी  चन्द्रगुप्त ऐंड हिज टाइम्स Copyright@ Bhishma Kukreti  Mumbai, India 11/4/2015 
   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --

 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -

      Ancient History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ; Ancient  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ;Ancient   History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient  History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ;  AncientHistory of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient  History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ;    AncientHistory of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;    History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Bijnor;  Ancient  History of Nazibabad Bijnor ;    Ancient History of Saharanpur; Ancient  History of Nakur , Saharanpur;  Ancient   History of Deoband, Saharanpur; Ancient  Ancient History of Badhsharbaugh , Saharanpur;Ancient Saharanpur History, Ancient Bijnor History;
कनखल , हरिद्वार का इतिहास ; तेलपुरा , हरिद्वार का इतिहास ; सकरौदा ,  हरिद्वार का इतिहास ; भगवानपुर , हरिद्वार का इतिहास ;रुड़की ,हरिद्वार का इतिहास ; झाब्रेरा हरिद्वार का इतिहास ; मंगलौर हरिद्वार का इतिहास ;लक्सर हरिद्वार का इतिहास ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार का इतिहास ;पाथरी , हरिद्वार का इतिहास ; बहदराबाद , हरिद्वार का इतिहास ; लंढौर , हरिद्वार का इतिहास ;बिजनौर इतिहास; नगीना ,  बिजनौर इतिहास; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास;सहारनपुर इतिहास 

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