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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, February 1, 2012

सैम पेत्रोडा : कौंग्रेसौ खुणि भीक मांगणो कोढ़ी


चबोड़ इ चबोड़ मा
                        सैम पेत्रोडा : कौंग्रेसौ खुणि  भीक मांगणो कोढ़ी  

       (Satire in Garhwali Prose, Satire in Uttarakhandi Literature, Satire in Kumauni Prose, Himalyan Satire)                      
                                                   भीष्म कुकरेती
                     
                 या ब्याळी (1/2/2011)  सिद्ध ह्व़े गे बल  राजनीती या राजकरण्या ब्युंत, कथगा निर्दयी, कथगा कंडारा   (कंटीला ), बेशरम , बिलंच होंद .   ब्याळी कौंग्रेसन  उत्तरप्रदेशौ चुनाव मा भारत को एक महान विचारक सैम पेत्रोदा  तैं बाल्मीकि समाज (बढई ) क नुमाइंदा घोषित करी दे . वाह रे राजनीति का फान्देबाज ! कुज्याण कथगा कुरागी ढोल बजान्दा तुम?  वाह रे ! एक सौ पचास बर्स्कुल्या कौंग्रेस पार्टी देख्याई  तेरी खज्यात अर देखी आली तेरी सेक्की की तीमा डेढ़ सौ साल को अनुभव च ! उत्तर प्रदेशौ चुनावी सुस्मि (झगड़ा ) मा राहुल गाँधी जब बोल्दो बल सैम पेत्रोदा  बढ़ाई समाज को च त कौंग्रेसै    सुसमत /अकड तैं माटो  मा मिल्दो बि देखी आल.  
                जब कोंग्रेसौ घोषित/अघोसित युवराज खुले आम बुल्दो बल सैम पैत्रोदा बढ़इ समाज को प्रतिनिधि च त साफ़ पता चलदो बल कौंग्रेसौ युवा राजकुमार बढ़इ समाज  को सेल्फ इस्टीम नि बढ़ाणो च बल्कण मा थाकौत , हार का सुस्कारा भरणो च. कोंग्रेसौ  लोक जब लखनौ   मा सैम पैत्रोदा बाल्मीकि समाज का पाळीदार बताण मा सिक्की जमाणा छया त साफ़ पता चलणो छौ बल इ लोक सठयारु   ह्व़े गेन जौंमा अब जनता लुभौणो  बान एक महान विचारक तैं जातीय जळम्व्ट/ जाळ मा डाळी दे.
  जै सैम पैत्रोदा  मा आम भारतीय  टेकनौलोजी अर एज्युकेसन मा क्रांति दिखदा छ्या अर कखी बि जातीय भेद भाव का क्वी छेंका (चिन्ह) सैम पैत्रोदा मा नि दिखेंदा छया अब हम तैं जबरन कॉंग्रेस बताणि च बल ह्यां ! सैम पैत्रोदा  क्वी अन्तराष्ट्रीय स्टार को नामी भारतीय नि च बस एक बढई  इ त च . या च भारत की पुराणि से पुराणि राजकरण्या पार्टी क लोबी, हूंच सोच!
   कौन्ग्रेसौ एक महान क्रान्तिकारी विचारक तैं एकदम जातीय लारा पैराण इनी च  जन कै आदिम पर ल्वीणि (असह्य दर्द ) ह्वाओ अर हौर लोक वै ल्वीणि वल़ू को  नाम पर चन्दा मांगणौ किराणा ह्वावन्। कोंग्रेसन सैम पैत्रोदा  जां अन्तराष्ट्रीय मनिख तैं बाल्मीकि समाज तक सीमित कौरिक   भोट मांगणो रुंड ब्यूँत  ख्वाज. कोंग्रेसी चुनौ मा या चाल कुछ नि च बस एक हीण गरण्या/रांगड्या  चाल च.  मी त बोल्दो बल कोंग्रेसौ न रमदौण (थाली में रखे सभी पदार्थों को अरुचिकर तरीके से मिलाना ) करी दे भै ! अर जब आप चुनाव या राजनीती मा रमदौण करिल्या त फिर अग्वाड़ी रमकणो जगा पर लुंज ह्वेका इ हिटल्या . राज- सत्ता की रणमणि (विरह वेदना और प्रियजन कि मिलन स्मृति ) मा  कौंग्रेसी बिसरी गेन कि सैम पैत्रोदा तैं अन्वाश्यक रूप मा ऊन अफुक़ुण इ ना सबी भर्त्युं खुणि रपटण्या (फिसलन वाली ) जमीन तैयार कौरी दे . ग्लोब्लाईजेसन को स्यूंसाट थ्वड़ा भौत जातीय/धार्मिक अवाज कम बि होणि छे छे अब कौंग्रेस का जातीय बमबारी से ग्लोबलिजेसनौ स्यूंसाटऔ  अब क्वी पुन्यात इ नि च बल जातीय बिगुल बजण बन्द ह्वावन धौं. जां डेढ़ बरसूं कि पार्टीक यि हाल छन  त फिर बी.एस.पी, या एस पी.,  वलूं पर क्यानको दोष भै?
गढ़वाळ म एक पौधा होन्द् ल्यचकुरु  जै पर झीस होन्दन अर वो विकिरणऔ  (pollination ) काम आन्दन. अच्काल एक महान विचारक सैम पैत्रोदा   तैं केवल बढ़यूँ प्रतिनिधि घोषित कौरिक कौंगेस्यूंन सैम पैत्रोदा तैं ल्यचकुरु का झीस बणे याल जां से बाल्मीकि समाज कोंग्रेस पर चिपकी जाओ. वाह ! डेढ़ सौ  बरसूं  से अळगै  कौंग्रेस तैं जख शेर जन दहाड़ण  छौ ,  हाथी जन  चिंघाडा मारण छौ वै कोंग्रेस ल्यराट (बकरी की मिमियाट) करणि च .
            सैम पैत्रोदा   एक अन्वेषक च पर जातीय बल पर सैम पैत्रोदा   अन्वेषक नि बौण.  सैम पैत्रोदा   एक व्यवसायी च पर   सैम पैत्रोदा जातीय कंधों पर  सैम पैत्रोदा व्यवसायी नि बौण. सैम पैत्रोदा विकास को महान जणगरो च पण सैम पैत्रोदा जाती की सीढ़ी कारण विकासु महान चिन्तक नि बौण. पण    कोंग्रेस का आज इन हाल छन जन बुल्यां  सैम पैत्रोदा   क्वी कोढ़ी ह्वाओ अर वै कोढ़ी तैं रेडी मा बैठैक कौंग्रेस भीक मंगणि ह्वाऊ , " दे  बाल्मीकि समाज का नाम से , जाती का नाम से से भोट  दे द्याओ बाबा !"  
 
Satire in Garhwali Prose, Satire in Uttarakhandi Literature, Satire in Kumauni Prose, Himalyan Satire to be continued ......
 
Copyright@ Bhishm Kukreti

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