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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, July 28, 2011

सम्लौंण

कुछ सुल्झयाँ
कुछ अल्झयाँ
कुछ उक्करयाँ
कुछ खत्याँ
कुछ हरच्यां
कुछ बिसरयाँ
कुछ बिस्ग्याँ
त कुछ उन्दू बौग्याँ
कुछ हल्याँ
कुछ फुक्याँ
कुछ कत्तर - कत्तर हुयाँ
मेरी इन्ह जिंदगी का पन्ना
बन बनि का हिवांला रंगों मा रुझयाँ
चौदिश बथौं मा उड़णा
हैरी डांडीयूँ - कांठीयूँ मा
चिफ्फली रौल्यूं की ढून्ग्युं मा
पुंगडौं-स्यारौं -सगौडियों मा
फूल -पातियुं मा
भौरां - प्वत्लौं मा
डाली- बोटीयूँ मा
चौक - शतीरौं मा
दगड़ ग्वैर-बखरौं मा
हैल - दथडियूँ मा
भ्याल - घस्यरियौं मा
पाणि -पंदेरौं मा
गुठ्यार- छानियौं मा
चखुला बणिक
डंडली - डंडली मा
टिपण लग्याँ
म्यरा द्वी
भुल्याँ - बिसरयाँ खत्याँ
बाला दिन |


रचनाकार :गीतेश सिंह नेगी ( सिंगापूर प्रवास से,सर्वाधिकार-सुरक्षित )

अस्थाई निवास: मुंबई /सहारनपुर
मूल निवासी: ग्राम महर गावं मल्ला ,पट्टी कोलागाड
पोस्ट-तिलखोली,पौड़ी गढ़वाल ,उत्तराखंड

1 comment:

  1. bahut badiya geet...
    geet padhkar gaon kee yaad bahut aane lagti hai..
    prastuti ke liye aabhar!

    ReplyDelete

आपका बहुत बहुत धन्यवाद
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