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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, February 1, 2010

एक , एस एम् एस

" मिन कख बोली अर क्या बोली ?"

हमरा गौमा " क्य बुलद अर क्य करद " वाली एक ददी छै ! वा सरया गौमा ये, ई नाम से जणै भी जांदी छै ! या उपाधी वी थै सुधी -सुधी नि मिली ! बर्षो क तजुर्बा अर अभ्यास से वीं हासिल कोरी !मयारू बुलाणो मतलब युच की , कुछ कैकी मील ! ! अब देखा ना हमरा पहाडमा , वखकी ब्वारियु थै उपाधी उ थै इनी मील जन्दीन मुफ्तमा , बिना कुछ करया ! उदाहरण का वास्ता केकु आदिम अगर मास्टर चा .., त , गौका सबी छोटा बड़ा वीथै मास्टरयाणी कैई की बुलोंदन ! लगिना फीती , ... बिना कुछ करया ! मजेकी बात बाठी या पैणा बटण दां भी, इनी बुलैजांद की मास्टरयाणी करो कु ! अब देखा ऩा सुबेदारै बीबी खुनै सुबोद्नी , डाक्टरी बीबी खुणई -डाक्टरीणी, सीपै की बीबी खुणई - सीपैणी त इनी वी द्दी पर भी भीती लगि गे छे वीकी क्या बुन आर क्यं कन पर ! कुछ अपबाद भी छन ये बिषय पर , जनकी नेता की बीबी खुणी कवी..., नेत्याणी नि बुलद ! गल्दारै बीबी खुणी, कवी भी गल्दारणी नि बुलद !


वी ददी की खाशियत छाई` की, पैली त, केका भी बारमा लम्बी लम्बी छोड़ी ! इनै उनै की लगे की ! सरया गौमा बबाल मचाई की बदनाम कैकी फिर बुल्दी छाई की मिन कबरी बोली, अर क्या बोली अर कैमा बोली ! एक मिनटम मुकरी जादी छई वा हमरा देसाका नेतौओ की जनी !

एक दा त, वीन गौका एक भला आदिम का वास्ता इनी बात, अर इनी छुई...., उभी, ठुसकी -फुसकी लगिकी बदनाम कैदी ! उ त फांस खाद खांद बचेदे लुखुल ! बादम पता लगी, की, ये सब काम वी दादी का छन ! जब भरी पंचैतं म , वीसे पुचैगी की तिल इनु किले कारी , अर इन किले बोली ? वा साफ़ मुकरी ग़े मिन बोली नि जू तुम छा बुना ! उदाहरण दे देकी बुन बैठी मिनट इनु बोली जैकू अर्थ समनी वालों ण गलत लगाई... ! मयारू फ्जितु से कवी जातीय दुश्मुनी अर ण वैल मयारू पुंगडो उज्याड खलाई त फिर इन किले बुलुलू ! वीक कु यु तर्क पंचैतं जत्गा छा सबी एक हैंक कु मुख दिखण लगिनी ! अब ब्वाल त क्या ब्वाला .. ?? अर , ददी उख बीटी चौड़ी छाती कैकी इन गे, जन बुलिंद वा कारगिल पर तिरंगा फैरैकी की जाणी होली ! या हाई स्कुल्म फर्स्ट आइ होली ! इनी कारनाम त वीन एक ना कई दफा कैनी ! हर दफा झूट बोली साफ़ निकललें की कला देखी ! गौ वालो न कतका दफा बोली को तू इलेक्शन में खड़ी ह्वेजा ! त्वेम नता बाणा सबी गुण छन ! पता वीकू जबाब क्या छो ?? फुन्डू फुका ... उ , नेताओं थै ! जू पांच साल तक भी नि रैन्दा ! अर जू रैनद भी छन, उ थै , आदिम त आदिम कुकर तक भी नि पुछुदू ! मी जब तक रो, अर जब तक चों , ई पध्बी पर बरकारा रोलु !

पता वीकू जबाब क्या छो ?? फुन्डू फुका ... उ , नेताओं थै ! जू पांच साल तक भी नि रैन्दा ! अर जू रैनद भी छन, उ थै , आदिम त आदिम कुकर तक भी नि पुछुदू ! मी जब तक रो, अर जब तक चों , ई पध्बी पर बरकारा रोलु !


ददील ईक हैंक्य पैंतरा फेंकी ... ब्याली एक , एस एम् एस कैल भेजी .. की पहलाणु इनु छो बुनू अर आज फिर एक एस एम् एस आई की ना जी ना... आपल गलत समझ दे मिट ये ना या चों बुनू ! अब बोला मी कख चों गलत न ..न..न.. अर मं क्या बोली ताबा ?

पराशर गौड़
२८ जनबरी २०१० रात ८ ..४६ पर

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